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इमामे हुसैन इंसाफ़ प्यार और क़ुर्बानी के अज़ीम पैकर व इंसानियत के बेमिसाल रहबर

  शहजादा ए गुल गूं क़बा राकिबे दोशे मुस्तफ़ा । राहते जाने फातिमा। लख़्ते दिले अली ए मुर्तजा। नूरे चश्मे हसने मुजतबा। सैय्यदुश्शुहदा। ताजदारे कर्बला। इमामे आली मक़ाम। सैय्यदना इमाम हुसैन व अला जद्दिहि अलैहिस्सलाम।  की हस्ती सब्र व शुक्र अज़्म हिम्मत ईसार सरफरोशी और बेमिसाल क़ुर्बानी की वो अज़ीम यादगार होने के साथ ही। इंकलाबात की एक दुनिया अज़्मो हौसले के जब्ले ओहद। सब्र व ज़ब्त हिम्मत व इस्तिक़ामत में । जिसकी मिसाल तारीख़ में दूर दूर तक कहीं भी नज़र नहीं आती।  *विलादत* :::: *आपकी पैदाइश 3 शाबान सन हिजरी 4- मुताबिक 8-जनवरी 626 ईस्वी - मदीना शरीफ़ में हुई*। शहजादा ए अली व ज़ेहरा। *सैय्यदना इमाम हसन मुजतबा* रदिअल्लाहु अन्हु। आपके बड़े भाई हैं। *फ़ज़ाइल व मनाक़िब* ::: ये दोनों नवासे अपने नाना मुस्तफ़ा करीम अलैहिस्सलाम को इस क़दर महबूब और प्यारे हैं। जो बयान से बाहर हैं। कई अहादीसे पाक। उस मिसाली मोहब्बत। और नाज़ बरदारी। का ख़ुत्बा पढ़ते नज़र आ रही हैं। सरकार सल्लललाहु अलैहि वसल्ल्म ने फ़रमाया कि हसन और हसन जन्नती नौजवानों के सरदार हैं। एक हदीस में है कि  हसन और दो जन्नती ...

गंगा जमनी तहज़ीब की हिफाज़त हम सबकी ज़िम्मेदारी

 *गंगा जमनी तहज़ीब की हिफाज़त हम सबकी ज़िम्मेदारी*  मादरे वतन प्यारा हिंदुस्तान जो कि मुख़्तलिफ़ मज़ाहिब के मानने वाले लोगों। अलग अलग तहज़ीब व सक़ाफ़त का चलन रखने वालों और कई तरह की बोलियाँ और ज़बाने बोलने वाले लोगों का मस्कन और गढ़ है । एक सर्वे के मुताबिक यहां बोली जानी वाली ज़बानों की तादाद तक़रीबन 427 है। जिनमें कुछ ज़बानें ऐसी हैं जो अपनी नुमायां ख़ुसुसियात की वजह से अपनी अलग पहचान रखती हैं। वतने अज़ीज़ की सबसे मुमताज़ ख़ूबी और ख़ूबसूरती ये है कि हर शख्स चाहे वो किसी भी। मज़हब व मिल्लत का हो। बिना किसी रोक टोक के अपने तौर पर अपने त्योहार जश्न और ख़ुशी मना सकता है। यहां की गंगा जमनी तहज़ीब आपसी भाई चारा मेलजोल और साम्प्रदायिक सौहार्द अपने आप में इतने बेमिसाल हैं जो इसकी ख़ूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। माज़ी क़रीब में तारीख के झरोखे से झांक कर जब हम देखेंगे तो इसकी दो चार पांच दस ही नहीं बल्कि अनेकों मिसालें मिल जाएंगी। जो क़ौमी एकता और अखंडता को दर्शाने के लिए बहुत काफ़ी हैं। युगों युगों से सूफ़ी संतों पीरों फ़क़ीरों दरवेशों और किसानों के इस देश में। गंदी सियासत का चेलें...

ईदुल अदहा (क़ुर्बानी) का हक़ीक़ी पैग़ाम

 ईदुल अदहा के दिन आयशा अपने घर के आंगन में सर झुकाए बैठी थी इस इंतज़ार में कि कोई पड़ौसी या रिश्तेदार जिन्होंने क़ुर्बानी की हो तो वो कुछ गोश्त ला कर दे दें। तो वो अपने बच्चों के लिए खाना बना सके। ईद की नमाज़ पढ़ कर उसके शौहर भी घर आ गए थे। उन्हें भी यही फ़िक्र थी जो आयशा को थी उनके चेहरे पर तो फ़िक्र की लकीरें थी। लेकिन दिखावे के लिए वो अख़बार के पन्नों को उलट पलट कर रहे थे। फ़िक्र इस लिए थी कि जो कुछ कमाते उस से घर का ख़र्च बड़ी मुश्किल से चलता था जिसमें अपने अहलो अयाल की परवरिश और बच्चों की पढ़ाई का बोझ अलग। लेकिन ग़रीब बाप इस उधेडबुन में था कि आज मेरे घर में कम से कम इतना तो गोश्त कहीं से आ जाए कि मेरे बच्चे आज तो महरूम न रहें। वो आसमान की तरफ़ देख कर जैसे मन ही मन रब से फ़रियाद कर रहा हो। और उसकी आंखों में आंसू भर आए। अभी थोड़ी ही देर गुज़री थी कि दरवाज़े पर दस्तक हुई।। फ़हीम भाई। फ़हीम भाई। बाहर आइये आवाज सुन कर उस शख्स ने चप्पल पहने और बाहर आया। उसने सलाम करते हुए ईद की मुबारक बाद दी और कहा। आपकी दुआ से घर पे क़ुर्बानी की है ये लीजिए गोश्त। कहते हुए उसने प्लास्टिक थैली जिस म...

मुजाहिदे आज़ादी मौलाना गुलाम फ़रीद आज़ाद क़ैसर बासनवी

 *हज़रत मौलाना गुलाम फ़रीद आज़ाद* (क़ैसर) *इंकलाबी ख़तीब शायर व अज़ीम मुजाहिदे आज़ादी एक तआरुफ़* *पैदाइश* :: आपकी बासनी ज़िला नागौर राजस्थान के एक मोअज़्ज़ज़ शरीफ़ और इल्मी घराने में हुई। आपके वालिदे गिरामी का नाम हज़रत मौलाना अब्दुल करीम चिश्ती सुलेमानी है। जो अपने वक्त के ज़बरदस्त आलिमे बा अमल मुत्तक़ी और बहुत परहेज़ गार सूफ़ी इंसान थे।     *इब्तिदाई तालीम* ::::     आपने अपने वालिदे गिरामी से हासिल की और अर्बी फ़ारसी व दर्से निज़ामी की तकमील अपने ताया हज़रत अल्लामा मौलाना मुफ़्ती अमीर अहमद साहब बक़ा अलैहिर्रहमा (साबिक़ इमाम जामा मस्जिद बासनी) की दर्सगाह से की। नीज़ शायरी में भी आपके उस्ताद हज़रत बक़ा ही हैं। आपको क़ुदरत की तरफ़ से कमाल ज़ेह्न क़ूव्वते हाफ़िज़ा व फ़ित्री सलाहिय्यतों जैसे जौहर अता हुए थे। यही वजह है कि आपने अपने तौर पर जो ख़िदमात अंजाम दीं वो अपने आप में बहुत अज़ीम और आबे ज़र से लिखने के लायक़ हैं।       *दर्स व तदरीस* :::    आपने अपनी फ़राग़त के बाद अपने आबाई वतन बासनी में रहकर कुछ अर्सा दर्स व तदरीस का काम अंजाम द...

حضرت مولانا نعمان احمد جاہدی علیہ الرحمہ

 *حضرت* *مولانا* *نعمان* *احمد* *جاہدی* *صابری* *علیہ* *الرحمہ* *____* *_____* *_____* *ایک* *گمنام* - - - - *مگر* *مثالی* *داعی* *و* *مبلغ* *اسلام*----- *بہ* *طور* *تعارف* *ایک* *چشم* *کشا* *تحریر* - - - - - قسط اول  ___________________________________________ ناگور راجستھان ، سے متصل قصبہ باسنی، میں ظاہری اسباب و علل مال و دولت کے اعتبار سے مفلس و نادار لیکن، دولت علم سے مالا مال و سرمایہ دار، ایک علمی گھرانہ،  جس کی، گوناگوں خوبیوں، علمی ادبی سرگرمیوں، اور بے لوث اشاعت تبلیغ دین کے کارناموں کی اپنی ایک تاریخی حیثیت ہے، جس میں رب تعالیٰ نے خلوص و لللہیت کے ساتھ اشاعت تبلیغ دین کا کام کرنے والے، تعلیم و تعلم کے علمبردار، بے نظیر داعیان دین حنیف، و مبلغین اسلام، ملت کا درد رکھنے والے صاحبان دل علماء کرام فضلاء عظام اور خطباء اسلام کو نسلاً بعد نسل پیدا فرمایا، جنہوں نے اپنے اپنے دور میں دعوت، ارشاد و تبلیغ کا فریضہ خالصا لوجہ اللہ بحسن و خوبی انجام دیا،______________ *حضرت*  *مولانا* *نعمان* *احمد* *جاہدی* *صابری* *علیہ* *الرحمہ* بھی اس سلسلۃ الذہب کی پانچویں پشت میں...

मुख़्तसर हालात ज़िन्दगी। हज़रत मुफ्ती ख़लीलुर्रहमान साहब सादिक़ुल वअद बासनवी अलैहिर्रहमा

 _______*आफ़ताबे* *बासनी* ________ *हज़रत* *अल्लामा* *मौलाना* *मुफ़्ती* *ख़लीलुर्रहमान* *साहब* *सादिक़ुल* *वअद* *बासनवी* *अलैहिर्रहमा* ___ अज़ क़लम ::: *इरफ़ान* *अहमद* *नोमानी* *जाहिदी* बासनी  आप राजस्थान के मारुफ़ क़स्बा बासनी के मशहूर इल्मी घराने के चश्मो चराग़ हैं। जो कि ज़बरदस्त आलिमे बाअमल। बहुत मुत्तक़ी व परहेज़गार  सूफ़ी तबीयत बुज़ुर्ग और अपने वक्त के  ज़िम्मेदार मुफ़्ती थे। आपने अपनी पूरी ज़िन्दगी मिल्लत की सलाह व फ़लाह की के लिए काम करने में गुज़ारी और हमेशा क़ौम की रहनुमाई फ़रमाई और इल्मे दीन के चराग़ रोशन किये। आपसे क़ब्ल आपके बुज़ुर्गों का भी यही मशग़ला  रहा जिसे उन्होंने वरासते इल्मे दीन की दौलत को अवाम में तक़सीम करते हुए अस्लाफ़ की अमानतों के अमीन और इस्लाम के सच्चे सपूत कहलाए। लोगों को फ़ैज़ाने इल्म से मालामाल किया और इसी को अपना मक़सदे हयात समझ कर ख़िदमते इस्लाम करते रहे।  *इब्तिदाई* *तालीम* ::: हज़रत मुफ़्ती ख़लीलुर्रहमान साहब ने इब्तिदाई तालीम अपने वालिदे गिरामी हज़रत मौलाना अब्दुल करीम साहब से घर पर ही हासिल की। और फ़ारसी अपने बड़े भाई ह...